संविधान सम्मान सम्मेलन में बोले राहुल- जातिगत जनगणना का असली मतलब न्याय है
-भाजपा-आरएसएस कुछ भी कहें, जाति जनगणना होकर रहेगी और 50 प्रतिशत आरक्षण की दीवार को तोड़ा जाएगा
नई दिल्ली। जाति जनगणना पर कांग्रेस का रुख दोहराते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि जाति जनगणना का असली मतलब न्याय है और यह देश में विकास की नई दिशा तय करेगी।
महाराष्ट्र के नागपुर में संविधान सम्मान सम्मेलन में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा-आरएसएस के लोग कुछ भी कहें या करें, लेकिन हिंदुस्तान में जातिगत जनगणना होकर रहेगी और 50 प्रतिशत आरक्षण वाली दीवार को तोड़ा जाएगा।
राहुल गांधी ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर जी, महात्मा गांधी जी ने कभी अपना दर्द नहीं देखा, उन्होंने हमेशा सिर्फ लोगों के दर्द की बात की। जब हिंदुस्तान ने अंबेडकर जी से संविधान बनाने के लिए कहा, तो इसका मतलब था कि संविधान में देश के करोड़ों लोगों का दर्द और उनकी आवाज गूंजनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि संविधान सिर्फ एक किताब नहीं है, ये जिंदगी जीने का तरीका है। संविधान के पीछे की सोच हजारों साल पुरानी है। इसमें जो लिखा है, वही बात महापुरुषों ने कही है। इसमें लिखा है कि सभी के बीच समानता होनी चाहिए, हर धर्म, हर भाषा, हर जाति का आदर होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब भाजपा-आरएसएस के लोग संविधान पर आक्रमण करते हैं, तो वे हिंदुस्तान की आवाज पर आक्रमण करते हैं। उनके द्वारा जातिगत जनगणना की बात करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि राहुल गांधी देश को बांटने की बात करते हैं। लेकिन वह (राहुल गांधी) देश को बताना चाहते हैं कि हिंदुस्तान के 90 प्रतिशत लोग देश की प्रगति में शामिल ही नहीं हो पाते हैं।
एक अर्थशास्त्री का हवाला देते हुए राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने (अर्थशास्त्री) ने अपने विश्लेषण में हिंदुस्तान को सबसे अधिक असमानता वाले देशों में से एक बताया था। राहुल गांधी ने कहा कि हमारे देश में असमानता का सबसे बड़ा कारण जातिगत भेदभाव है। उन्होंने कहा कि यह दलित, पिछड़े या आदिवासी समुदायों के लोगों द्वारा हर रोज महसूस किया जा रहा है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान से ही देश की अलग-अलग संस्थाएं बनी हैं। अगर संविधान नहीं होता तो चुनाव आयोग भी नहीं बनता।
राहुल गांधी ने खुलासा किया कि जनता से संवाद के दौरान उनके पास जातिगत जनगणना की छोटी सी आवाज आई थी। फिर धीरे-धीरे ये आवाज बड़ी होती गई। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना का असली मतलब न्याय है। उनकी सोच है कि बिना शक्ति और धन के आदर का कोई मतलब नहीं है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने हाल ही में रायबरेली में हुई दिशा बैठक का हवाला देते हुए कहा कि इस बैठक में मौजूद अफसरों में कोई दलित, ओबीसी वर्ग का नजर नहीं आया।
उन्होंने कहा कि उनका काम हिंदुस्तान के लोगों की आवाज उठाने का है। जनता ने कहा कि जातिगत जनगणना होनी चाहिए, इसलिए इस आवाज को उन्होंने हर जगह उठाया।
राहुल गांधी ने कहा कि कॉर्पोरेट से लेकर न्यायपालिका तक दलित, ओबीसी और आदिवासी समुदाय के लोग नजर नहीं आते। ये हालात हर जगह हैं। अधिकतर क्षेत्रों में 90 प्रतिशत हिंदुस्तान दिखता ही नहीं है। आदिवासी, दलित, पिछड़े वर्ग के लोग मजदूरी करते हुए या मनरेगा की लाइन में नजर आएंगे। जाति जनगणना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पता चलेगा कि देश की 90 प्रतिशत आबादी का व्यावहारिक रूप से सत्ता में कोई दखल नहीं है और उनके पास कोई संपत्ति नहीं है। सत्ता और देश की संपत्ति दोनों पर ही कुछ चुनिंदा लोगों का नियंत्रण है। जातिगत जनगणना से हिंदुस्तान के हर वर्ग को यह पता लग जाएगा कि देश में उनकी क्या भूमिका है, उनके पास कितनी शक्ति और कितना पैसा है।