दिवाली पर हड़ताल करेंगे दिल्ली के बिजली कर्मचारी

-31 अक्टूबर को सीएम आवास का होगा घेराव

दिवाली पर हड़ताल करेंगे दिल्ली के बिजली कर्मचारी
-31 अक्टूबर को सीएम आवास का होगा घेराव
नई दिल्ली। ठेकेदारी हटाओ राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा ने शनिवार को दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली की केजरीवाल सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार ने हमारी लंबित मांग नहीं मानी तो 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री केजरीवाल के आवास का घेराव किया जाएगा और दिवाली पर दिल्ली की बिजली गुल कर दी जायेगी। मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीसी कपिल ने कहा कि ठेकेदारी प्रथम रूप में एक शोषणकारी प्रथा है। और यह अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी वर्ग के आरक्षण के खिलाफ षड्यंत्र है। इस प्रथा के तहत राजनेताओं, अधिकारियों और ठेकेदारों की तिगड़ी मिलकर, ठेकाकर्मियों को मिलने वाले वेतन को सरेआम लूट रही है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने 2013, 2015 और 2020 के चुनावी घोषणा पत्रों में जो वादा किया था लेकिन सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है। सरकार के नौ वर्षों के शासनकाल में मात्र 432 युवाओं को सरकारी नौकरी मिल पायी है। पांच लाख 32 हजार सरकारी पद खाली पड़े हुए है। इन पदों पर स्थायी भर्ती करने की बजाय, आउटसोर्स को बढ़ावा देकर ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ठेका प्रथा के विरोध में मोर्चा दर्जनों बार धरने, प्रदर्शन, रैलियां और घेराव कर चुका है मगर सरकार मनमानी और हठधर्मिता पर अड़ी हुई है। उन्होंने सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि 31 अक्टूबर को मोर्चा दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों मे कार्यरत 25 हजार संविदा कर्मियों की मांगों को लेकर आंदोलन करेगी। यदि सरकार ने मांगे नहीं मानी तो वे 31 अक्टूबर को दिवाली पर बिजली हड़ताल की घोषणा करेगा। हमारी मुख्य मांगों में दिल्ली सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर दिल्ली के सभी संविदा कर्मचारियों को पक्का करने का प्रस्ताव पास करे। इसके अलावा खतरनाक कार्य में कर्मचारी की मृत्यु पर शहीद का आश्रित और एक करोड़ रुपए का मुआवजा एवम परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाएं। दिल्ली के पावर सेक्टर की बिजली वितरण कंपनी बीएसईएस के कर्मचारियों के 22 सूत्रीय मांग पत्र की सभी मांगों पर गंभीरता पूर्वक विचार और समुचित समाधान किया जाये। अनिवार्य सेवा वाले बिजली विभाग मे प्रशासनिक नियंत्रण सीधे रूप से बीएसईएस प्रशासन के हाथों मे है, वहां से ठेकेदारों को हटाकर संविदा कर्मचारियों को सीधा कंपनी रोल पर लिया जाए।

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