नई दिल्ली,। देश के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले सुरक्षा बलों को चाहे वे किसी भी बल में क्यों न हो उन्हें शहीद का दर्जा मिलना ही चाहिए। दिल्ली पुलिस सेवानिवृत अराजपत्रित अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष छिद्दा सिंह रावत ने कंफेडरेशन आफ एक्स पारामिलिट्री फोर्सेस मार्टेरिस (शहीद) वेलफेयर एसोसिएशन के सोमवार को जंतर मंतर पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर वक्ता कहा कि साल 1959 से अब तक सभी बलों के जान गंवाने वाले 35 हजार जवानों को शहीद का दर्जा मिले और उनके परिवार को शहीद को मिलने वाली सारी सुविधाएं दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले 21 अक्तूबर को दोपहर में देश में जहां कहीं भी बल तैनात हैं वें भारत माता की जय और जय हिंद बोलकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस में भी वेतन के मामले में कई प्रकार की असमानताएं है जिसके लिए हमने कई बार केंद्रीय गृह मंत्री को आवेदन दिया है लेकिन अभी तक उस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
हजारों की संख्या में पहुंचे अर्द्धसैनिक बलों के जवानों और राज्यों के पुलिस बलों को कंफेडरेशन के चेयरमेन रिटायर एडीजी एचआर सिंह, प्रेसिडेंट जयेंद्र सिंह राणा, वीएस कदम, पंजाब पुलिस के रिटायर आईजी सुरेश शर्मा, रिटायर आईजी एमएल शर्मा, महासिचव रणवीर सिंह, दिल्ली पुलिस के भगीरथ डाबला सहित कई लोगों ने संबोधित किया।
चेयरमेन हरि सिहं ने कहा कि हमारे जवान हमेशा देशहित में तत्पर रहते हैं। लेकिन सरकार की ओर से जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, उसके लिए उन्हें मोहताज रहना पड़ता है। यह भिन्नता क्यों है? इसलिए इस प्रकार के आंदोलन और प्रदर्शन की जरूरत समय समय पर करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली, राज्यों में अर्द्धसैनिक बल कल्याण बोर्ड का गठन, सीजीएचएस डिस्पेंसरी का विस्तार, सीपीसी कैंटीन पर जीएसटी में छूट, सीआईएसएफ जवानो को साठ दिनों की छुट्टी और सीएलएमएस सुविधा नहीं दी जा रही है। इन सुविधाओं के न मिलने से हर साल दस हजार जवान नौकरी से त्यागपत्र या स्वैच्छिक सेवानिवृति ले लेते हैं।

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